पत्थर की मूरतो में समझा कि तू खुदा है, खाके वतन का अपना हर जर्रा देवता है। यही है सच्ची देशभक्ति। अपने देश के कण-कण को देवता समझकर उसके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करना ही हमारा कर्तव्य है। अपने देश की सभ्यता ,संस्कृति ,साहित्य नागरिक और चिंतन दर्शन के प्रति अटूट विश्वास रखने का नाम ही देश भक्ति है। भक्ति का स्वरूप बदलता रहता है। जब देश पर दूसरे की नजर गङी हो तब उसकी आंखें निकाल लेना ही देशभक्ति है। परतंत्रता की स्थिति में अपने तन -मन और धन को देश के नाम पर उत्सर्ग कर देना चाहिए। हमें भूलना नहीं चाहिए कि स्वाधीनता के संग्राम में कितनी बहनों ने अपनी राखी, कितनी माताओं ने अपने दूध और कितनी ललनओ ने अपने सुहाग को उत्सर्ग कर दिया था। जलियाँवाला बाग तो एक उदाहरण है। सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह से लेकर महात्मा गांधी और लौहपुरुष बल्लभभाई पटेल आदि की कीर्तियो से आज भी रस्मे निकल रही है। ...
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